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डायट गम्हरिया में आयोजित जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी

डायट, गम्हरिया, सरायकेला-खरसावां में दिनांक 16/12/25 को जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी -2025 का आयोजन किया गया l इस कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों के तीन संवर्ग के छात्र-छात्राओं ने अपने प्रदर्श का प्रदर्शन किया l प्रत्येक संवर्ग से प्रखंड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदर्श के साथ जिले में आयोजित प्रदर्शन में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान किया गयाl आयोजित प्रदर्शनी में इस बात का विशेष ध्यान दिया गया कि प्रदर्शन अपनी मौलिकता, सृजनात्मकता, उपयोगिता के साथ प्रस्तुत किया जाएl कार्यक्रम में जमशेदपुर वीमेंस विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ वी श्यामला, महिला कॉलेज चाईबासा से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ बबीता कुमारी, श्रीनाथ कालेज ऑफ़ एजुकेशन से असिस्टेंट प्रोफेसर लीना मोहन्ता, डी बी एम एस कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुरीना भुल्लर सिंह उपस्थित थीं l
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य श्री कैलाश मिश्रा एवं अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ l दीप मंत्र शिक्षिका दीपा के द्वारा प्रस्तुत किया गया l दीप प्रज्ज्वलन गीत की प्रस्तुति नीमडीह की छात्राओं ने दिया l पंकज कुमार द्वारा संचालित प्रदर्शनी के संवर्ग 6-8 में प्रथम स्थान NR CM SOE के मयंक कुमार सिंहदेव के समूह ने प्राप्त किया I द्वितीय स्थान UMS RAJNAGR के जानसन मुंडिया एवं समूह तथा तृतीय स्थान के जी बी भी खरसावां के शीतल प्रामाणिक एवं समूह ने प्राप्त किया l
9-10 संवर्ग में प्रथम स्थान के जी बी भी नीमडीह की चाँदनी एवं समूह ने प्राप्त किया I द्वितीय स्थान JBAV KUKRU के सीमा एवं समूह तथा तृतीय स्थान +2 Gov High School खरसावां के तापस एवं समूह ने प्राप्त कियाl
11-12 संवर्ग में प्रथम स्थान S S +2 गम्हरिया के आदित्य कुमार के समूह ने प्राप्त किया I द्वितीय स्थान UPG+2 High School चांडिल के साधन शेख एवं समूह तथा तृतीय स्थान के NR CM SOE सरायकेला के संगीता सतपती एवं समूह ने प्राप्त किया I
इस प्रदर्शनी को सफल बनाने में संकाय सदस्य पंकज कुमार, आर लक्ष्मण राव, डॉ मनीला कुमारी, किशोर कुमार प्रसाद, अनुभा सिंह, सीमा कुमारी, लिपिक प्रभात कुमार मांझी, कर्मचारी दशरथ महतो, राजकिशोर महतो, जवाहर राम, कंप्यूटर ऑपरेटर राजकिशोर कुम्भकार का महत्वपूर्ण योगदान रहाI

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर