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डायट गम्हरिया में एक दिवसीय केस स्टडी पर संगोष्ठी का आयोजन

डाइट गम्हरिया में दिनांक 28/03/2026 को एक दिवसीय केस स्टडी पर संगोष्ठी का उद्घाटन प्राचार्य सह जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री कैलाश मिश्रा,संस्थान के सदस्यों एवं शिक्षकों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ I प्रभारी प्राचार्य श्री पंकज कुमार ने विषय प्रवेश कराते हुए बताया कि केस स्टडी संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षकों को केस स्टडी में पारंगत करना है l शिक्षक नवाचार का प्रयोग प्रतिदिन करते हैं, पर उसका दस्तावेजीकरण नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण अच्छे-अच्छे नवाचार आधारित शिक्षण विधि सभी शिक्षकों तक नहीं पहुंच पाता हैl
इस केस स्टडी में प्रथम प्रस्तुति मध्य विद्यालय तिल्ला नीमडीह के सहायक शिक्षक देवेंद्र नाथ मुदी ने दी l उसके उपरांत उत्क्रमित मध्य विद्यालय बंधुगोड़ा के हिमांशु शेखर महतो, मध्य विद्यालय तुमुंग की शम्पा कुल्लू, उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय खोखरो की बालिका बाला, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सामानपुर की मौसमी शुक्ला, उत्क्रमित उच्च विद्यालय सियाडीह की मरियम नाग, उत्क्रमित मध्य विद्यालय काला झरना के मनोज कुमार बेसरा, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सारंगपोसी के पार्थो राउत, उत्क्रमित मध्य विद्यालय सोनाड़ी की पुनीता कुमारी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिताकलांग के बन बिहारी प्रधान, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पदमपुर के पद्मलोचन नायक, उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोखोदिकी के चितरंजन मेहता, राजकीय बुनियादी विद्यालय राजनगर के देवेंद्र कुमार, डायट गम्हरिया की संकाय सदस्य सीमा कुमारी ने नवाचार आधारित कई केस स्टडी को प्रस्तुत किया l इस केस स्टडी के खुला सत्र में कई शिक्षकों ने नवाचार आधारित केस स्टडी प्रस्तुत किया l इस कार्यक्रम के उपरांत सभी शिक्षकों ने यह आश्वासन दिया कि आने वाले समय में केस स्टडी के क्षेत्र में सरायकेला के शिक्षक राज्य में अपनी अलग पहचान बनाएँगे l
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में संकाय सदस्य श्री पंकज कुमार, आर लक्ष्मण राव, डॉ मनीला कुमारी, श्रीमती अनुभा सिंह, श्रीमती सीमा कुमारी, प्रधान लिपिक प्रभात कुमार मांझी, कम्प्यूटर ऑपरेटर राजकिशोर कुम्भकार, संस्थान के कर्मी राजकिशोर महतो, जवाहर राम एवं मोहम्मद कुर्बान की भूमिका महत्वपूर्ण रही l

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर