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Sl. No. |
TOPICS |
DESCRIPTION |
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Theme/Subject: |
School Education |
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Stage of Education: |
Secondary |
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Topic of Research: |
सरायकेला-खरसावाँ के माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के माध्यमिक परीक्षा में शैक्षिक पिछड़ेपन के कारणों का अध्ययन |
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4 5 6 |
Name and address of the Investigator(s) with Email ID:
Name of the Institution where the research was conducted:
Category: (Research study/ Action Research / Others) |
Dr Manila Kumari, DIET Gamharia, Seraikela-Kharsawan manilakumari70@gmail.com
1. एस.एस.+2 उच्च विद्यालय, चाण्डिल 2. राजकीय +2 उच्च विद्यालय, तिरुलडीह 3. एस.एस.+2 उच्च विद्यालय, गम्हरिया 4. एस.एस.+2 उच्च विद्यालय, खरसावाँ 5. राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय, कुचाई 6. अनुग्रह नारायण +2 उच्च विद्यालय, पिलिद 7. +2 उच्च विद्यालय, रघुनाथपुर 8. एस.एस. +2 उच्च विद्यालय, राजनगर 9. सीएम. एसओई.के.जी.बी.भी. सरायकेला
Other (Applied Research) |
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7 8 |
Language of Research Report:
Year of Completion: |
HINDI
2026 |
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Published / Unpublished: |
Printed |
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Introduction: |
शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है, जो न केवल व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होती है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा भी निर्धारित करती है। भारत जैसे विकासशील देश में माध्यमिक शिक्षा का स्तर विद्यार्थियों के भविष्य की नींव रखता है, परंतु आज भी कई क्षेत्रों में शैक्षिक पिछड़ापन एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जिनमें से सरायकेला-खरसावाँ भी झारखण्ड में एक शैक्षिक रूप से पिछड़ा जिला है।
शैक्षणिक कारक शिक्षा की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करते हैं। इनमें शिक्षक की योग्यता, पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता, शिक्षण सामग्री की उपलब्धता, विद्यालय का वातावरण और परीक्षा प्रणाली प्रमुख हैं। यदि ये कारक मजबूत हों तो शिक्षा जीवनोपयोगी बनती है, अन्यथा शैक्षिक पिछड़ापन बढ़ता है।
विद्यार्थियों के शैक्षिक पिछड़ेपन पर पारिवारिक कारक गहरा प्रभाव डालते हैं। मुख्य रूप से माता-पिता की शिक्षा, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक वातावरण, अनुशासन और भावनात्मक सहयोग की कमी बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों को बाधित करती है। शिक्षित माता-पिता बच्चों को पढ़ाई के महत्व को समझाते हैं और अध्ययन में सहयोग करते हैं वहीं अशिक्षित या कम शिक्षित माता-पिता अक्सर बच्चों को शैक्षिक मार्गदर्शन नहीं दे पाते, जिससे पिछड़ापन बढ़ता है।
विद्यार्थियों के शैक्षिक पिछड़ेपन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में व्यक्तिगत कारक भी एक महत्वपूर्ण कारक है। इसके अंतर्गत मुख्यतः विद्यार्थियों की शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विशेषताएँ आती हैं। इनमें बुद्धि स्तर, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, रुचि, प्रेरणा और व्यक्तित्व की विशेषताएँ प्रमुख हैं। यदि ये कारक कमजोर हों तो विद्यार्थी शैक्षिक रूप से पिछड़ जाते हैं। यह अध्ययन सरायकेला-खरसावाँ के विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा शैक्षिक नीतिकारों को माध्यमिक स्तर पर शैक्षिक पिछड़ेपन के कारणों को समझने और उनके समाधान हेतु ठोस रणनीति बनाने में सहायक होगा। |
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Objective: |
इस अध्ययन के निम्न उद्देश्य हैं- 1. शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े प्रमुख शैक्षणिक कारकों (जैसे- शिक्षण की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम भार) के प्रभाव का अध्ययन करना। 2. शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े पारिवारिक पृष्ठभूमि के प्रभाव का अध्ययन करना। 3. शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े विद्यार्थियों के व्यक्तिगत कारकों (जैसे- स्वास्थ्य, अभिप्रेरणा की कमी, भविष्य की अनिश्चितता) के प्रभाव का अध्ययन करना। |
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Methodology: |
यह अनुसंधान एक विवरणात्मक अनुसंधान है। यह सर्वेक्षण विधि पर आधारित मिश्रित प्रणाली से संबंधित शोध है, जो सरायकेला-खरसावाँ जिले में शैक्षिक पिछड़ेपन के कारणों के अध्ययन पर आधारित है। आँकड़ों के संग्रह हेतु शिक्षक से गूगल फॉर्म भरवाते हुए आँकड़ों का संग्रह किया गया। विद्यार्थियों से Academic Backwardness Reasons Scale (ABRS-TGGRJS) भरवाया गया।
सांख्यिकीय मापनी के रूप में औसत निकाल कर उन्हें दंड आरेख की सहायता से प्रदर्शित किया गया। साथ ही मानक विचलन एवं जेड स्कोर भी बताया गया।
न्यादर्श के रूप में सरायकेला-खरसावाँ जिले के सभी प्रखंडों में स्थित कुल 59 उच्च विद्यालयों से 10 विद्यालय का चयन किया गया। प्रत्येक विद्यालयों के कक्षा 10 एवं कक्षा 11 से कुल 40 विद्यार्थियों का चयन यादृच्छिक रूप से लाटरी विधि से किया गया। साथ ही 20 विद्यालय के 21 शिक्षकों से गूगल फॉर्म भरवाते हुए आँकड़ों का संग्रह किया गया। |
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Findings: |
आँकडों के विश्लेषण के उपरांत पाया गया कि सरायकेला-खरसावाँ जिले में शैक्षिक पिछड़ेपन को औसत रूप से शैक्षणिक कारक 25.8, पारिवारिक कारक 21.2 एवं व्यक्तिगत कारक 21 प्रभावित करते हैं।
शिक्षकों से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार छात्र अनुपस्थिति 67 प्रतिशत एवं अभिभावकों का सहयोग न मिल पाना 67 प्रतिशत शैक्षिक पिछड़ेपन का प्रमुख कारण है। शोध निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि सरायकेला-खरसावाँ जिले के शैक्षिक पिछड़ेपन का प्रमुख कारक छात्र अनुपस्थिति एवं अभिभावकों का असहयोगात्मक रवैया है।
इस शोध अध्ययन से यह ज्ञात हुआ कि सरायकेला-खरसावाँ जिले के माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के माध्यमिक परीक्षा में पिछड़ेपन का मुख्य कारण विद्यार्थियों की अनुपस्थिति एवं अभिभावकों का सहयोग न मिल पाना है। इसके अलावा विद्यार्थियों का निम्न शैक्षिक स्तर भी शैक्षिक पिछड़ेपन का प्रमुख कारण है। |
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Implication: |
शैक्षिक पिछड़ेपन के कारणों को ज्ञात करने के बाद इनके निराकरण हेतु प्रयास करना संभव हो सकेगा। विद्यार्थियों के अनुपस्थिति को कम करने के लिए जिला स्तर पर किए जाने वाले पहल की समीक्षा की जानी होगी ताकि विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारणों की पहचान की जा सके एवं उनका निराकरण करते हुए विद्यार्थियों के अनुपस्थिति को कम किया जा सके।
अभिभावकों का सहयोग मिले इसके लिए विद्यालय में अभिभावकों के लिए समय-समय पर उनकी सुविधा के अनुसार कार्यक्रमों का आयोजन करना होगा। विद्यार्थियों को प्राथमिक कक्षाओं से ही गतिविधि आधारित शिक्षण द्वारा पठन-पाठन पर बल देना होगा ताकि विद्यार्थियों की समझ एवं उनके कौशल का विकास हो सके।
विद्यार्थियों को माध्यमिक कक्षाओं में प्रायोगिक शिक्षण, करके सिखने और गतिविधि आधारित शिक्षण प्रदान करना होगा, ताकि उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत हो। शिक्षकों को कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण पर ध्यान देने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी होगी ताकि शिक्षक तनाव मुक्त होकर कक्षा में गतिविधि आधारित शिक्षण पर ध्यान दे सकें।
इस समस्या के समाधान के लिए एक एकीकृत, बहुस्तरीय और सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय और सरकारी तंत्र सभी की सक्रिय भागीदारी शामिल हो। वर्ष 2026 की परीक्षा से पहले इन कारणों की पहचान और निवारण करना जिले के शैक्षिक परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। |
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Abstract Prepared/Submitted By: Official Address: Email: Phone: |
Dr Manila Kumari DIET, Gamharia, Seraikela-Kharsawan manilakumari70@gmail.com 7004312761 |
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Keywords: (Maximum 6 words) |
1. शैक्षिक पिछड़ापन 2. शैक्षिक उपलब्धि 3. शैक्षिक पिछड़ेपन के कारण 4. शैक्षणिक कारक 5. पारिवारिक कारक 6. व्यक्तिगत कारक |