Sl. No.

TOPICS

DESCRIPTION

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Theme/Subject:

सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा एवं छात्रों का समग्र विकास

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Stage of Education:

Elementary / Middle (मध्य विद्यालय)

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Topic of Research:

सरायकेला-खरसावाँ जिले के मध्य वि‌द्यालयों के छात्रों में शैक्षणिक परिणामों पर सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन

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Name and Address of the Investigator(s) with email:

 

Name of the Institution where the Research was conducted:

 

Category: (Research Study/Action Research/Other)

KISHOR KUMAR PRASAD

DIET GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN-832108

kishordietjsr@gmail.com

 

DIET GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN

 

Action Research

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8

Language of Research Report:

 

Year of Completion:

हिन्दी

 

2025-26

9

Published / Unpublished:

Unpublished

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Introduction: (200 words)

प्रस्तावनाः

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में छात्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें केवल शैक्षणिक उपलब्धि ही नहीं, बल्कि सामाजिक एवं भावनात्मक विकास भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी संदर्भ में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (Social-Emotional Learning - SEL) एक महत्वपूर्ण अवधारणा के रूप में उभरकर सामने आई है, जो छात्रों में आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, सहानुभूति, सामाजिक कौशल तथा प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है।

 

सरायकेला-खरसावाँ जिले के मध्य वि‌द्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के शैक्षणिक परिणामों पर SEL कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि यह न केवल छात्रों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाता है, बल्कि उनके सीखने की क्षमता एवं कक्षा में सहभागिता को भी बढ़ाता है। वर्तमान शोध का उ‌द्देश्य SEL कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन, सामाजिक व्यवहार एवं भावनात्मक संतुलन में होने वाले परिवर्तनों का विश्लेषण करना है।

 

यह अध्ययन इस बात को समझने का प्रयास करता है कि SEL कार्यक्रम किस प्रकार छात्रों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होते हैं तथा विद्यालयी वातावरण को अधिक सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं प्रभावी बनाते हैं।

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Objective:

उद्देश्यः

इस अध्ययन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

1. सरायकेला-खरसावाँ जिले के मध्य विद्यालयों के छात्रों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना।

2. छात्रों के सामाजिक कौशल के विकास में SEL कार्यक्रमों की भूमिका का विश्लेषण करना।

3. छात्रों में निर्णय निर्धारण एवं आत्म-प्रबंधन की क्षमता पर SEL कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन करना।

4. SEL कार्यक्रमों के छात्रों के शैक्षणिक परिणामों पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन करना।

5. सामान्य विद्यालयों एवं CMSOE वि‌द्यालयों के छात्रों के बीच SEL के प्रभाव की तुलना करना।

6. SEL कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उपयुक्त सुझाव प्रदान करना।

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Methodology: (200 words)

शोध विधिः

प्रस्तुत अध्ययन में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) कार्यक्रमों के छात्रों के शैक्षणिक परिणामों पर प्रभाव का विश्लेषण करने हेतु वर्णनात्मक एवं सर्वेक्षण आधारित शोध पद्धति का उपयोग किया गया है। इस अध्ययन का क्षेत्र सरायकेला-खरसावाँ जिले के चयनित मध्य विद्यालय हैं, जिनमें सामान्य विद्यालयों एवं CMSOE विद्यालयों को शामिल किया गया है।

 

अध्ययन के लिए कुल 120 छात्रों का चयन किया गया, जिनका चयन यादृच्छिक नमूना पद्धति (Random Sampling) के आधार पर किया गया। डेटा संग्रह हेतु लिकर्ट स्केल (Likert Scale) आधारित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया, जिसमें सामाजिक-भावनात्मक जागरूकता, सामाजिक कौशल, निर्णय-निर्धारण एवं आत्म-प्रबंधन तथा SEL कार्यक्रमों के प्रभाव से संबंधित प्रश्न शामिल थे।

 

संग्रहित आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत विधि एवं सारणीकरण (Tabulation) के माध्यम से किया गया तथा परिणामों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने के लिए पाई चार्ट एवं बार ग्राफ का उपयोग किया गया। इस प्रकार यह अध्ययन छात्रों के शैक्षणिक एवं सामाजिक-भावनात्मक विकास पर SEL कार्यक्रमों के प्रभाव को स्पष्ट करने का प्रयास करता है।

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Findings: (200 words)

निष्कर्षः

प्रस्तुत अध्ययन के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) कार्यक्रम का छात्रों के शैक्षणिक एवं व्यवहारिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश छात्र सामाजिक-भावनात्मक जागरूकता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं तथा वे अपनी भावनाओं को पहचानने एवं व्यक्त करने में सक्षम हैं।

 

सामाजिक कौशल के संदर्भ में यह देखा गया कि SEL कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों में सहयोग, सहानुभूति एवं समूह में कार्य करने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, निर्णय-निर्धारण एवं आत्म-प्रबंधन से संबंधित कौशलों में भी सुधार पाया गया, जिससे छात्र अपने व्यवहार को नियंत्रित करने एवं उचित निर्णय लेने में अधिक सक्षम हुए हैं।

 

अध्ययन के परिणाम यह भी दर्शाते हैं कि SEL कार्यक्रमों के प्रभाव से छात्रों की कक्षा में सहभागिता, उपस्थिति एवं शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार हुआ है। सामान्य विद्यालयों एवं CMSOE विद्यालयों के बीच तुलना करने पर यह पाया गया कि दोनों प्रकार के वि‌द्यालयों में SEL के सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

 

अतः निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि SEL कार्यक्रम छात्रों के समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।

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Implications: (200 words)

प्रस्तुत अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) कार्यक्रम का छात्रों के समग्र विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसके आधार पर यह निहितार्थ निकलता है कि विद्यालयों में केवल शैक्षणिक उपलब्धि पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

 

SEL कार्यक्रमों के प्रभाव से छात्रों में आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, सहानुभूति एवं सहयोगात्मक व्यवहार जैसे कौशल विकसित होते हैं, जो उनके सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि शिक्षकों को अपने शिक्षण में SEL गतिविधियों को समाहित करना चाहिए, जिससे कक्षा का वातावरण अधिक सकारात्मक एवं सहयोगपूर्ण बन सके।

 

इसके अतिरिक्त, शिक्षा नीति निर्माताओं के लिए यह आवश्यक है कि वे पाठ्यक्रम में SEL को एक अनिवार्य घटक के रूप में शामिल करें। अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर एवं विद्यालय दोनों स्थानों पर समान वातावरण मिलने से छात्रों का विकास अधिक संतुलित होता है।

 

अतः यह अध्ययन इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है कि SEL कार्यक्रमों को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाकर छात्रों के शैक्षणिक एवं जीवन कौशल दोनों का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

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Abstract Prepared/Submitted By:

Official Address:

Email:

Phone:

KISHOR KUMAR PRASAD

DIET GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN-832108

kishordietjsr@gmail.com

7992419426

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Keywords: (Maximum 6 words)

1. सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL)

2. शैक्षणिक परिणाम

3. सामाजिक कौशल

4. आत्म-प्रबंधन

5. निर्णय-निर्धारण

6. मध्य विद्यालय छात्र

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर