Theme/Subject:

(School Education/Teacher Education/Science Education/Language Education/ Value Education/Education Technology/Inclusive Education/Educational Psychology/Gender Education and Allied Subject)

School Education

Stage of Education:

(Foundation/Preparatory/Middle/Secondary/All Stages)

 

Middle and Secondary

Topic of Research:

उत्क्रमित उच्च विद्यालय नेंगटासाई में   Digi SATH     कार्यक्रम की प्रभावशीलता का मूल्यांकन

Name and address of the Investigator(s) with Email ID:

Dr Manila Kumari

DIET Faculty, DIET GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN

 

Name of the Institution where the research was conducted

 

उत्क्रमित उच्च विद्यालय नेंगटासाई

 

 

Category:

(Research study/ Action Research / Others)

Research Study

Language of Research Report:

 

Hindi

Year of Completion:

 

2023

Published / Unpublished

Printed Copy

Introduction:

      झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय में Digi SATH कार्यक्रम की उपादेयता को जानने के लिए झारखंड राज्य के सरायकेला-खरसावाँ जिला के गम्हरिया प्रखंड में स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय नेंगटासाई का चयन किया गया। यह विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित है I कोरोना काल में जब विद्यालयों को बंद कर दिया गया तो बच्चों की पढ़ाई को नियमित जारी रखने और बच्चों को उनके स्तर का मूलभूत ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से बीसीजी और पीरामल फाउंडेशन के सहयोग से  Digi SATH   कार्यक्रम  2020 में  लांच किया गया और व्हाटसएप्प ग्रुप बनाया गया। झारखंड में 4 अप्रैल 2022 से नियमित रूप से  Digi SATH  कार्यक्रम के तहत सरकारी विद्यालय के शिक्षकों-छात्रों और अन्य हितधारकों को झारखंड  शैक्षिक अनुसंधान परिषद के द्वारा शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराया जाने लगा I Digi SATH   कार्यक्रम राज्य सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए लागू किया गया।  

 

 

 

Objective:

इस अध्ययन का निम्नांकित उद्देश्य हैं .

विद्यालय के शिक्षकों के लिए Digi SATH कार्यक्रम की उपयोगिता का अध्ययन करना।

कार्यक्रम पर सामाजिक परिवेश के प्रभाव का अध्ययन।

कार्यक्रम पर भौगोलिक परिवेश के प्रभाव का अध्ययन करना।

कार्यक्रम पर पारिवारिक आर्थिक स्थिति के प्रभाव का अध्ययन करना।

कार्यक्रम पर पीयर ग्रुप के पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

कार्यक्रम पर अभिभावकों की अशिक्षा/ जागरूकता के प्रभाव का अध्ययन करना।

कार्यक्रम पर परिवार में अधिक भाई.बहन  होने पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन  करना

कार्यक्रम पर किशोरावस्था के कारण पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

कार्यक्रम के प्रति लड़कों/लड़कियों की अभिरूचि का अध्ययन करना।

कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर तकनीकी कारणों के पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

 

 

Methodology:

यह अनुसंधान एक विवरणात्मक अनुसंधान है। सर्वेक्षण  विधि की सहायता से आँकड़ों का संग्रह किया गया।  आँकड़ों के संग्रह हेतु शिक्षक,छात्र एवं अभिभावकों के लिए 5 प्वाइंट अनुस्थिति मापनी का निर्माण किया गया। एवं उसे विशेषज्ञों की सहायता से मानकीकृत करवाया गया। न्यादर्श के रूप में उत्क्रमित उच्च विद्यालय नेंगटासाई के कक्षा 7 से कक्षा 10 तक कुल 40 विद्यार्थियों का चयन यादृच्छिक रूप से  लाटरी  विधि से किया गया।  साथ ही 3 शिक्षक  एवं 3 अभिभावकों से भी अनुस्थिति मापनी की सहायता से आँकड़ों का संग्रह किया गया। ।   

आँकड़ों का संग्रह करने के उपरांत आँकड़ों को व्यवस्थित करते हुए उनका विश्लेषण किया गया। सांख्यिकीय मापनी के रूप में प्रतिशत निकाल कर उन्हें दंड चार्ट की सहायता से प्रदर्शित किया गया।  

 

Findings:

 

आँकड़ों  के विश्लेषण के पश्चात् पाया गया कि

 विद्यार्थियों के अनुसार

  • 25% बच्चों के लिए Digi SATH कार्यक्रम पढ़ने में सहायक है।
  • 30 % बच्चों के लिए यह कार्यक्रम रूचिकर है।
  • 35 %बच्चों ने इस कार्यक्रम को आॅफलाइन कक्षा का एक विकल्प बताया।
  • 17.5 % बच्चे दूरदर्शन पर प्रसारित इस कार्यक्रम से लाभान्वित होते हैं।
  • 47.5% बच्चों के लिए कोरोना काल में यह कार्यक्रम पढ़ाई का एकमात्र माध्यम था।
  • पीयर ग्रुप से प्रभावित होकर 62.5 % बच्चे इस कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं।
  • आॅफलाइन कक्षा होने के बावजूद 37.5 % बच्चे  कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
  • 47.5 % बच्चे घर पर माता-पिता का हाथ बँटाने के कारण कार्यक्रम में भाग नहीं ले पाते हैं।
  • 65 % बच्चे आर्थिक स्थिति के कारण एक ही मोबाइल होने पर कार्यक्रम में भाग नहीं ले पाते हैं।
  • 75%बच्चे इस कार्यक्रम की तुलना में आॅफलाइन कक्षा को अधिक पसंद करते हैं।
  • कक्षा 6-8 की तुलना में कक्षा 9-10 के बच्चों को इस कार्यक्रम में 10% अधिक भाग लेने का अवसर मिलता है।
  • 55% बच्चे तकनीकी कारणों से कार्यक्रम में नियमित रूप से भाग नहीं ले पाते हैं।

शिक्षकों के विचार

  • यह कार्यक्रम 66.6 % शिक्षण प्रकिया में सहायता पहुँचाता है।
  • यह  कार्यक्रम बच्चों के शिक्षण अधिगम में 50% सहायक है।
  • यह कार्यक्रम बच्चों के आॅफलाइन कक्षा में 33.3 % सहायक है।
  • यह कार्यक्रम 0 % बच्चों के आॅफलाइन कक्षा का विकल्प हो सकता है।
  • आॅफलाइन कक्षा होने से कार्यक्रम की सहभागिता में 83.3% कमी आयी है।
  • इस कार्यक्रम से 33.3% लड़कियाँ अधिक लाभान्वित होती हैं।
  • यह कार्यक्रम 33.3% कोरोना काल में शिक्षण का माध्यम बना।
  • इस कार्यक्रम  में व्यसन की आदत के कारण 50% बच्चे भाग नहीं ले पाते हैं।
  • 66.6 % बच्चों की पारिवारिक आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कार्यक्रम में भाग नहीं ले पाते हैं।
  • यह कार्यक्रम 66.6 % भौगोलिक स्थिति से प्रभावित होता है।
  • इस कार्यक्रम पर 33.3% बच्चों के पीयर ग्रुप के सकारात्मक सोच का प्रभाव पड़ता है।
  • इस कार्यक्रम पर बच्चों के अभिभावकों की अशिक्षा का 66.6 % नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • इस कार्यक्रम पर किशोरवय बच्चों की मोबाइल पर अन्य गतिविधि में शामिल होने  का 66.6 % नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

अभिभावकों के विचार

  • 16.7 %अभिभावकों का मानना है कि इस कार्यक्रम से कक्षा 6-8 के बच्चों को सहायता मिलती है।
  • 50 %अभिभावकों का मानना है कि इस कार्यक्रम से कक्षा 9-10 के बच्चों को सहायता मिलती है।
  • 66.7 %अभिभावकों का मानना है कि कोरोना काल में यह कार्यक्रम बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र माध्यम रहा ।
  • 83.3 %अभिभावकों का मानना है कि बच्चे मोबाइल से कार्यक्रम में कम और अन्य गेम खेलने में अधिक ध्यान देते हैं।

शोध अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों से यह ज्ञात होता है कि  कार्यक्रम एक सीमा में शिक्षण अधिगम में सहायक है पर यदि आफलाइन कक्षा से तुलना करें तो आफलाइन कक्षा ही Digi SATH  कार्यक्रम से बेहतर है। कोरोना काल में यह कार्यक्रम शिक्षण का एकमात्र विकल्प  था और  यह कार्यक्रम शिक्षण अधिगम में सदैव सहायक रहेगा।

 

 

Implication:

 

इस शोध से प्राप्त निष्कर्ष से यह ज्ञात होता है कि विद्यालयी शिक्षा में आनलाइन कक्षा आफलाइन कक्षा में सहायक है, विकल्प नहीं।

इसका उपयोग आफलाइन कक्षा में आनेवाली समस्याओं के निराकरण हेतु किया जा सकता है, जिससे शिक्षण को बेहतर बनाया जा सकता है ।

विषय आधारित शिक्षकों की कमी को अन्य विषय के शिक्षक के मार्गदर्शन में Digi SATH  कार्यक्रम की सहायता से विभिन्न विषयों को सरलतापूर्वक पढ़या जा सकता है और बच्चों के विषय आाधारित ज्ञान को सुदृढ़ किया जा सकता है।  यह कार्यक्रम पूर्णरूपेण आफलाइन कक्षा का विकल्प नहीं बल्कि उसका एक सशक्त सहायक माध्यम बन सकता है।

कुछ समस्याएँ जैसे पारिवारिक आर्थिक स्थिति का निराकरण बेरोजगारी की समस्या के निराकरण के उपरांत ही संभव है।

भौगोलिक, तकनीकी एवं अशिक्षा जैसी समस्याएँ धीरे- धीरे विकास के साथ दूर हो जाएँगी।

 

Abstract Prepared/Submitted By:       Dr Manila Kumari

 

 

Official Address:    DIET, GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN

dightgamharia1@gmail.com

 

 

Email: manilakumari70@gmail.com

 

Phone: 7004312761

 

Keywords: (Maximum 6 words)

 

Digi SATH

आनलाइन कक्षा

 

 

 

 

 

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर