Theme/Subject:

(School Education/Teacher Education/Science Education/Language Education/ Value Education/Education Technology/Inclusive Education/Educational Psychology/Gender Education and Allied Subject)

 

School Education

Stage of Education:

(Foundation/Preparatory/Middle/Secondary/All Stages)

 

 

Preparatory

Topic of Research:

जिले के विद्यालयों में प्रारंभ किए प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों की उपस्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन

Name and address of the Investigator(s) with Email ID:

Pankaj Kumar

DIET Faculty, DIET GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN

 

Name of the Institution where the research was conducted

म0 वि0 कुलुपटंगा

उ0 म0 वि0 सालडीह

उ0 म0 वि0 रापचा

नगरपालिका उडिया म0 वि0 सरायकेला

उ0 म0 वि0 वार्ड न0-4

उ0 म0 वि0 तबलापुर

म0 वि0 स्टेशन बस्ती चाण्डिल

उ0 म0 वि0 पुरीसीली

उ0 म0 वि0 भादुडीह

Category:

(Research study/ Action Research / Others)

Research Study

Language of Research Report:

 

Hindi

Year of Completion:

 

2024

Published / Unpublished

Printed Copy

 

Introduction:

 

प्रयास कार्यक्रम अनामांकित बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तथा छीजन वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें विद्यालय से जोड़े रखने की रणनीति है। किसी विद्यालय के पोषक क्षत्रे में दो प्रकार के बच्चे होते हैं। प्रथम पोषक क्षेत्र में  निवास करने वाले बच्चे एवं दूसरे पोषक क्षेत्र से बाहर निवास करने वाले बच्चे किसी भी विद्यालय में नामंाकित बच्चों में तीन प्रकार के बच्चे पाये जातें है। प्रथम नियमित उपस्थितति वाले बच्चे द्वितीय अनियमित उपस्थित वाले बच्चे एवं तृतीय छीजित बच्चे। अनियमित उपस्थिति और लंबी अनुपस्थिति वाले बच्चे होते हैं। प्रयास  कार्यक्रम अनामांकित छीजित एवं सभांवित छीजन वाले बच्चों को जोड़ने का कार्यक्रम है।

   छीजन के पीछे कई कारण हैं, जिन्हें रोकना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती भरा काम है। शिक्षा सचिव के रविकुमार के अनुसार बच्चो के स्कूल छोड़ने के पीछे कई वजहे हो सकती है, सामाजिक आर्थिक कारणों के साथ-साथ जागरूकता का अभाव भी हो सकता है, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने पूरी कार्य योजना बनाई है। उम्मीद है कि आने वाले समय में ड्रपआउट रेट और कम होगा। उन्हांने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार डॅªापआउट रेट में कमी आई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के आँकड़ो के तौर पर झारखण्ड में डॅªापआउट कम है, इसके बावजदू अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने का प्रयास एक बार फिर से किया जाऐगा। सरायकेला जिले के मध्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं में प्रारंभ किए गए प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों की उपस्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन विषय पर शोध हेतु न्यादर्श के रूप में सरायकेला जिले के 3 प्रखंड के 3-3 मध्य विद्यालयों के कक्षा 3-5 तक के 30-30 विद्यार्थियों का चयन किया गया ।

 

Objective:

इस अध्ययन का उद्देश्य है-

  • शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में प्रयास कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति का अध्ययन करना।
  • ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में प्रयास कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति का अध्ययन करना।
  • शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में प्रयास कार्यक्रम के प्रति छात्र / छात्राओं की जागरूकता का अध्ययन करना।
  • ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में प्रयास कार्यक्रम के प्रति छात्र / छात्राओं की जागरूकता का अध्ययन करना।
  • प्रयास कार्यक्रम के प्रति छात्र / छात्राओं की जागरूकता का अध्ययन करना।
  • प्रयास कार्यक्रम के बच्चों की उपस्थिति पर पडऩे वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

Methodology:

  अध्ययन एक विवरणात्मक अनुसंधान है, जिसके लिए सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया I जिले के विद्यालयों में प्रारंभ किए गए प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों की उपस्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन हेतु सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया।जिसमें अनुपस्थिति मापनी का प्रयोग करते हुए प्रदत्त एकत्रित किया गया।

 कक्षा 3 से 5 तक के उपस्थित विद्यार्थियो में प्रत्येक कक्षा से 5 लड़के और 5 लड़कियो का चयन यादृच्छिक रूप से लाटरी विधि से किया गया। इसके उपरान्त चयनित सभी विद्यार्थियो को एक कक्षा में बैठाते हुए उनसे अनुस्थिति मापनी की सहायता से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर ली गई।

प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों की उपस्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव की  प्रभाशीलता को प्रतिशत निकाल कर  दंडचार्ट की सहायता से दर्शाया गया। साथ ही प्रदत्तो का विश्लेषण करते हुए प्रत्येक पूर्ण किए गए प्रश्न के संबंध में विद्यार्थियो के विचार को दण्डचार्ट की सहायता से दर्शाते हुए उसका विश्लेषण प्रस्तुत किया गया एवं प्रतिशत के माध्यम से छात्रोपस्थिति को दर्शाया गया है।

Findings:

आँकड़ों के विश्लेषण के पश्चात् पाया गया कि

  • प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण एवं अर्थापन के पश्चात् यह पाया गया कि
  • गम्हरिया प्रखंड में प्रयास कार्यक्रम लागू होने से पूर्व छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 75.4 था एवं प्रयास कार्यक्रम लागू होने के उपरांत 2023 तक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 82.66 है।
  • चाण्डिल प्रखंड में प्रयास कार्यक्रम लागू होने से पूर्व छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 77.77 था एवं प्रयास कार्यक्रम लागू होने के उपरांत 2023 तक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 79.88 है।
  • सरायकेला प्रखंड में प्रयास कार्यक्रम लागू होने से पूर्व छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 66.33 था एवं प्रयास कार्यक्रम लागू होने के उपरांत 2023 तक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 78.44 है।
  • तीनों प्रखंडों में प्रयास कार्यक्रम लागू होने से पूर्व छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 73.18 था एवं प्रयास कार्यक्रम लागू होने के उपरांत 2023 तक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का प्रतिशत 80.32 है।

Implication:

 

आँकड़ों के विश्लेषण के उपरांत पाया गया कि प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों की उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हुई है।

इस शोध से प्राप्त निष्कर्ष से यह ज्ञात होता है कि प्रयास कार्यक्रम अत्यधिक प्रभावशाली कार्यक्रम है, जिससे छात्र-छा़त्राओं के नामांकन दर एवं उनकी उपस्थिति में वृद्धि हुई है।

प्रयास कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कम -से-कम दो शिक्षकों का होना अनिवार्य है। दो शिक्षकों के बिना प्रयास कार्यक्रम को सुचारू एवं वास्तविक रूप से चला पाना कठिन है।

 

Abstract Prepared/Submitted By:   Pankaj Kumar

Official Address:    DIET, GAMHARIA, SERAIKELA-KHARSAWAN

dightgamharia1@gmail.com

 

 

Email: pankajkumar322d@gmail.com

 

Phone: 7717741019 / 9431753237

 

Keywords: (Maximum 6 words)

 

प्रयास कार्यक्रम

GER

 

 

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर