Theme/Subject:

(School Education/Teacher Education/Science Education/Language Education/ Value Education/Education Technology/Inclusive Education/Educational Psychology/Gender Education and Allied Subject)

School Education

Stage of Education:

(Foundation/Preparatory/Middle/Secondary/All Stages)

Secondary

Topic of Research:

सरायकेला-खरसावाँ जिले के माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के छीजित दर को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन।

Name and address of the Investigator(s) with Email ID:

Pankaj  Kumar

pankajkumar322d@gmail.com

Name of the Institution where the research was conducted

एस०एन० +2उ०वि० टिकर

+2 उ०उ०वि० देवलटाँड़

+2 ए०एन०उ०वि० पिलिद

माडल स्कूल ईचागढ़

उ०उ०वि० डुमरडीहा

प्रोजेक्ट उ०वि० सोसोमली

Category:

(Research study/ Action Research / Others)

Applied Research

Language of Research Report:

HINDI

Year of Completion:

2025

Published / Unpublished

Printed

Introduction:

  भारत में स्कूल शिक्षा में छात्र-छात्राओं के ड्रापआउट की संख्या बढ़ना न केवल शिक्षा व्यवस्था पर बल्कि स्कूल प्रबंधकों पर एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है। स्कूल न जाने वाले बच्चो की संख्या आठ करोड़ से भी ज्यादा है, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि स्थिति काफी गंभीर है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से सन् 2022 की बोर्ड परिक्षाओं के विश्लेषण में बताया गया है कि दसवीं और बारहवी के स्तर पर देश में लाखों बच्चे पढाई छोड़ देते है। विश्लेषण के मुताबिक, पिछले साल पैंतीस लाख विद्यार्थी ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने नहीं गए। इनमें से साढे़ सत्ताईस लाख सफल नहीं हुए और साढे़ सात लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा नहीं दी। इसी तरह केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की पिछले वर्ष बारहवी के बाद 2.34 लाख विद्यार्थियों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी। इनमें से सतहत्तर फिसदी ग्यारह राज्यों से था यानि अट्ठावन लाख विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं में पढ़ाई छोड़ देते हैं तो यह किसी भी सरकार के लिए चिंता की बात होनी चाहिए और यह समग्र शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर अमल पर सवालिया निशान है।

किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था की कामयाबी इसमें है कि शुरूआती से लेकर उच्च स्तर तक की शिक्षा हासिल करने के मामले में एक निरंतरता हो। अगर किसी वजह से आगे की पढ़ाई करने में किसी विद्यार्थी के सामने में अड़चन आ रही हो तो उसे दूर करने के उपाय किए जाएँ। लेकिन बीते कई दशकों से यह सवाल लगातार बना हुआ है कि एक बड़ी तादाद में विद्यार्थी स्कूल कालेजो में बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते है और उनकी आगे की पढ़ाई को पूरा करने के लिए सरकार की और कई कदमों को उठाने के बाद वांछित सफलता नहीं मिल पा रही है। इस मसले पर सरकार से लेकर शिक्षा पर काम करने वाली संगठनों के अध्ययन रिपोर्टों में अनेक बार इस चिंता को रेखांकित किया गया है, लेकिन अब तक कोई सार्थक हल सामने नही आया हैं।

     बच्चों को स्कूल भेजने का उद्देश्य शिक्षा ग्रहण कर एक अच्छा नागरिक बनाना तो है ही, शिक्षा जीविकोपार्जन में भी प्रमुख भूमिका निभाती है। भारत में शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद, जमीनी स्तर पर बहुत सारी चीज बदली है। मसलन स्कूल में बच्चों का नामांकन बढ़ा है। हर साल आठवीं पास करने वाले बच्चों की संख्या के आँकडे तेजी से बढे़ हैं पर इसके साथ ही शिक्षा में गुणवत्ता और स्कूल में बच्चों के ठहराव का सवाल ज्यों का त्यों कायम है।

     सरकारी योजनाओं एवं नीतिगत स्तर पर शिक्षा को उच्च प्राथमिकता मिलती दिखती है बावजूद स्कूली शिक्षा के दौरान बीच में पढाई छोडने की प्रवृत्ति बनी हुई है। यह समझना मुश्किल है कि इतने लंबे वक्त से यह चिंता कायम है फिर क्यों नही इस मसले पर किसी हल तक पहुँचना एक ऐसा सवाल है जिस पर व्यापक चिंतन मंचन की जरूरी है। यह जग जाहिर है कि एक ओर स्कूल - कालेज में शिक्षा पद्धति में तय मानक बहुत सारे विद्यार्थियों के लिए सहजता से ग्राहय नही होते, वही पढाई में निरंतरता नहीं रहने के पीछे सामाजिक और आर्थिक कारक भी एक बडी भूमिका निभाते है। लगातार शिक्षा के मंदिर मे मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी बच्चो को स्कूल छोड़ने पर विवस करते है। शिक्षा का अधिकार कानून आने के बाद भारत में सिंगल टीचर स्कूल की मौजूदगी बनी हुई है। स्कूलो में विभन्न विषयों के अध्यापक नहीं हैं, इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वे आठवीं के बाद आगे पढ़ने लायक समता का विकास नहीं कर पाते। स्कूल आने वाले लाखों बच्चों में गणित और भाषा के बुनियादी कौशल का विकास नहीं हो पा रहा है। इस कारण से स्कूल छोडने वाली स्थितियाँ निर्मित होती हैं।

Objective:

प्रस्तुत शोध में निम्न परिस्थितियों का अध्ययन करने का प्रयास है:-

1) इस क्षेत्र में छीजन के कारणों का अध्ययन करना।

2) क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में नामांकन और छीजन की स्थिति का अध्ययन करना।

3) छीजन की समस्या के दर को कम करने के उपायों का अध्ययन करना।

Methodology:

सरायकेला-खरसावाँ जिले के माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के छीजित दर को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन‘‘ विषय पर शोध कार्य हेतु सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया । आँकड़ों के संग्रह के लिए रूब्रिक का निर्माण किया गया। छीजन की समस्याओं को जानने के लिए अनुस्थिति मापनी का निर्माण किया गया। अनुस्थिति मापनी के निर्माण के पश्चात् उसका मानकीकरण करवाकर उसकी सहायता से आँकड़ों का संग्रह किया गया। आँकड़ों के विश्लेषण हेतु प्रतिशत निकालना, सारणी निर्माण, दंड चार्ट एवं पाई चार्ट का प्रयोग सांख्यिकीय मापनी के रूप में किया गया।

Findings:

प्राप्त आँकड़ो से यह ज्ञात होता है कि ईचागढ प्रखण्ड के एस०एन० +2 उच्च विद्यालय टीकर, के बच्चों में छीजन का मुख्य कारण अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक आर्थिक स्थिति है।  ईचागढ प्रखण्ड के उत्क्रमित +2 उच्च विद्यालय देवलटाँड़ के बच्चों में छीजन का मुख्य कारण अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक आर्थिक स्थिति है। ईचागढ़ प्रखण्ड के माडल स्कूल ईचागढ़, के बच्चों में छीजन का मुख्य कारण अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक आर्थिक स्थिति है। ईचागढ़ प्रखण्ड के एस०एन० +2 उच्च विद्यालय पिलिद, के बच्चों में छीजन का मुख्य कारण अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक आर्थिक स्थिति है।

Implication:

सरायकेला-खरसावाँ जिले के नौ प्रखण्ड में से दो प्रखण्ड में छीजित बच्चे पाये गये। जिनमें ईचागढ़ में बच्चों के छीजन का मुख्य कारण अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक-आर्थिक स्थिति है एवं राजनगर में बच्चों के छीजन का मुख्य कारण लैंगिक असमानता, अभिभावकों की जागरुकता एवं पारिवारिक-आर्थिक स्थिति है। छीजन के मुख्य कारणों को जानने के पश्चात उन्हें दूर करने के लिए सर्वप्रथम अभिभावकों को विद्यालय में बुलाकर या उनके घर जाकर उन्हें जागरुक करना होगा जिससे वे जागरुक होंगे और लैंगिक असमानता को दूर किया जा सकेगा। सरकारी योजनाओं का लाभ वैसे लाभुक परिवारों को मिले ताकि बच्चे पारिवारिक-आर्थिक समस्या के कारण शिक्षा से वंचित न हो छीजित न हो।

 

Abstract Prepared/Submitted By: Pankaj Kumar

Official Address:DIET, Gamharia, Seraikela-Kharsawan

Email: pankajkumar322d@gmail.com

Phone: 9431753237

Keywords: (Maximum 6 words)

छीजित दर

लैंगिक असमानता

शारीरिक स्वास्थ्य

अभिभावकों की जागरुकता

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर