Theme/Subject:

(School Education/Teacher Education/Science Education/Language Education/ Value Education/Education Technology/Inclusive Education/Educational Psychology/Gender Education and Allied Subject)

School Education

Stage of Education:

(Foundation/Preparatory/Middle/Secondary/All Stages)

Secondary

Topic of Research:

सरायकेला-खरसावाँ के माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की शिक्षक अभिप्रेरणा और कार्य संतुष्टि का विद्यार्थिंयों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषणI

Name and address of the Investigator(s) with Email ID:

Dr Manila Kumari,

DIET Gamharia, Seraikela-Kharsawan 

manilakumari70@gmail.com

Name of the Institution where the research was conducted

उत्क्रमित उच्च विद्यालय, न्यू कालोनी, एस एन प्लस टू उच्च विद्यालय, आदित्यपुर, एस एस प्लस टू उच्च विद्यालय, गम्हरिया एवं तीन ग्रामीण,उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बनसा, प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय सोसोमोली, वार्षिणी प्लस टू उच्च विद्यालय, सरायकेला

Category:

(Research study/ Action Research / Others)

Applied Research

Language of Research Report:

HINDI

Year of Completion:

2025

Published / Unpublished

Printed

Introduction:

शिक्षा से ही किसी भी देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत का पता चलता है।  शिक्षा एवं शिक्षण व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंगों में शिक्षक और विद्यार्थी आते हैं। शिक्षक शिक्षण प्रक्रिया की मुख्य धुरी हैं। पहले की तुलना में शिक्षकों की कार्य पद्धति अधिक जटिल और कठिन हो गयी है। आधुनिक समय में तकनीकी विकास ने शिक्षकों के दायित्वों को बढ़ा दिया है। विभिन्न तकनीकी संसाधन जितने उपयोगी होते हैं, उतने ही विनाशकारी भी .......। ऐसे में शिक्षक ही कोमल मन के बच्चों को सही और गलत की परख करवा सकते हैं । यदि शिक्षक ही तनावग्रस्त और परेशान रहेंगे तो वे किस प्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे? शिक्षण व्यव्स्था सुदृढ़ बनी रहे इसके लिए शिक्षकों में अभिप्रेरणा एवं कार्य संतुष्टि का होना अत्यधिक आवश्यक है। अभिप्रेरणा कार्य संतुष्टि का एक महत्वपूर्ण कारक है, जो विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित करता है।  अभिप्रेरणा का सामान्य अर्थ है- किसी कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित करना है। किसी मनुष्य के मन की वह भावना जो उसे कुछ करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहती है, उसे अभिप्रेरणा कहते हैं। अभिप्रेरणा वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति एक निश्चित दिशा में निश्चित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सक्रिय हो जाता है एवं लक्ष्य प्राप्ति तक सक्रिय रहता है। अभिप्रेरणा लक्ष्य आधारित व्यवहार का उत्प्रेरण है। यह आंतरिक या बाह्य हो सकता है। सीखने की प्रक्रिया में अभिप्रेरणा का अत्यधिक महत्व है। किसी भी कक्षा में अधिगम प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए , शिक्षक-छात्रों में पढ़ाई के प्रति रूचि उत्पन्न करने के लिए अभिप्रेरणा अत्यधिक महत्वपूर्ण कारक हैI

Objective:

इस अध्ययन के निम्न उद्देश्य हैं -

·       शहरी क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

·       ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

·       शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन करना।

·       शहरी क्षेत्र के शिक्षकों के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

·       ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

·       शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर पड़ने वाले प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन करना।

Methodology:

यह शोध एक अनुप्रयुक्त अनुसंधान है। इसमें गुणात्मक डाटा प्रश्नावली सर्वेक्षण का प्रयोग करते हुए प्राप्त किया गया । गुणात्मक मान को सांख्यिकीय मान में परिवर्तित किया गया। उसके उपरांत विभिन्न चरों के बीच सह-संबंध निकाला गया । 

   यह अध्ययन सरायकेला-खरसावाँ जिले के 97 माध्यमिक विद्यालयों में  3 शहरी और 3 ग्रामीण माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा 10 के कुल 300 विद्यार्थियों पर आधारित है । 300 विद्यार्थियों में 150 शहरी माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थी और 150 ग्रामीण माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों से डाटा संग्रह किया गयाI डाटा संग्रह करने के लिए शिक्षक अभिप्रेरणा एवं कार्य संतुष्टि अनुस्थिति मापनी एवं विद्यार्थी उपलब्धि परीक्षण मापनी की सहायता ली गयी ।

प्रदत्तों के विश्लेषण हेतु प्राप्त प्रदत्तों को एक्सेल की सारणी में प्रदर्शित करते हुए शिक्षक अभिप्रेरणा एवं विद्यार्थी उपलब्धि और कार्य संतुष्टि एवं विद्यार्थी उपलब्धि के बीच एक्सेल की सहायता से सह-संबंध दर्शाया गया ।

Findings:

शहरी क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच .9726 सह-संबंध है, जो 1 के निकटतम संख्या है, जिससे यह ज्ञात होता है कि शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच .9535 सह-संबंध है, जो 1 के निकटतम संख्या है, जिससे यह ज्ञात होता है कि शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच तुलनात्मक अघ्ययन करने पर पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्र के शिक्षक अभिप्रेरणा का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर अधिक प्रभाव पड़ता है।

शहरी क्षेत्र के शिक्षक कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच .9259 सह-संबंध है, जो 1 के निकटतम संख्या है, जिससे यह ज्ञात होता है कि शिक्षक के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच .9753 सह-संबंध है, जो 1 के निकटतम संख्या है, जिससे यह ज्ञात होता है कि शिक्षक के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल के बीच तुलनात्मक अघ्ययन करने पर पाया गया कि शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक के कार्य संतुष्टि का विद्यार्थियों के सीखने के प्रतिफल पर अधिक प्रभाव पड़ता है।

Implication:

प्राप्त परिणामों से यह ज्ञात होता है कि जिले के माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक अभिप्रेरणा में बढ़ोत्तरी करते विद्यार्थियों के शैक्षिक उपलब्धि को बेहतर बनाया जा सकता है। शिक्षकों को अभिप्रेरित करने के लिए कार्यशाला/सम्मेलनों का आयोजन किया करना होगा, ताकि शिक्षक अभिप्रेरित रहें और विद्यार्थियों के शैक्षिक उपलब्धि बेहतर हो सके। शिक्षकों में कार्य संतुष्टि की भावना रहने पर वे बेहतर तरीके से विद्यार्थियों के पठन-पाठन एवं सर्वांगीण विकास पर ध्यान देंगे, जिससे विद्यार्थियों के शैक्षिक उपलब्धि  बेहतर होगी और वे देश के सुयोग्य नागरिक बन पाएँगे। शिक्षकों में कार्य संतुष्टि की भावना को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय के परिवेश में आवश्यक सुधार किया जा सकेगा। शिक्षकों को विद्यालय परिसर में तनावमुक्त रखने की व्यवस्था करनी होगी। शिक्षकों को तनावमुक्त रखने एवं उनकी कार्य संतुष्टि को बढ़ाने के समय-समय पर उनकी समस्याओं का आकलन करते हुए उसका निराकरण करना अत्यावश्यक है।

Abstract Prepared/Submitted By: Dr Manila Kumari

Official Address:DIET, Gamharia, Seraikela-Kharsawan

Email:manilakumari70@gmail.com

Phone: 7004312761

Keywords: (Maximum 6 words)

·       शिक्षक अभिप्रेरणा

·       कार्य संतुष्टि

 

एक दीपक दूसरे दीपक को तब तक नहीं जला सकता है, जब तक कि वह स्वयं न जल रहा हो, उसी प्रकार एक शिक्षक तब तक सच्ची शिक्षा प्रदान नहीं कर सकता, जब तक कि स्वयं अध्ययन न कर रहा हो I
-- रवींन्द्र नाथ टैगोर